नेपाली जनता की आंखों से हटने लगा चीन का पर्दा, नेपाल की 10 जगहों पर कर लिया है कब्जा

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By : News RedBull | Published On: Jun 24, 2020 |
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नेपाली जनता की आंखों से हटने लगा चीन का पर्दा, नेपाल की 10 जगहों पर कर लिया है कब्जा

Kathmandu//New Delhi//Online Desk : पूरी दुनिया जानती है कि चालबाज चीन किसी का नहीं है। दोस्ती की आड़ में दूसरे देशों का दोहन करना और उसका जमीन हड़पना चीन की पुरानी नीति है। यह सब जानते हुए भी नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली चीन के झांसे में आ गए। चीन के बहकावे में आकर नेपाली प्रधानमंत्री अनाप शनाप हरकतें करने लगे। लेकिन अब नेपाली जनता की आंखों से चीन का पर्दा हटने लगा है।

नेपाल के दो गाँव पर चीन ने कर लिया ...

चीन नीति को लेकर प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के खिलाफ नेपाल में अब असंतोष बढ़ने लगा है। नेपाली अखबार ने खुलासा किया है कि चीन  ने तिब्बत सीमा पर स्थित एक नेपाली गांव पर धौंस दिखाकर कब्जा कर लिया है। इस गांव पर 60 सालों से चीन का कब्जा है और नेपाल की सरकार भी इसका विरोध करने से डरती रही है।

चीन ने काठमांडू को फंसाने के लिए ऋण-जाल का पालन किया है

 वह नेपाल में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए आर्थिक प्रभाव का उपयोग कर सकता है और शर्तों के साथ ऋण देता है, जिसे पता है कि नेपाल वापस भुगतान करने में सक्षम नहीं होगा, और इसलिए कब्जा करना शुरू कर देता है।

विवादास्पद बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत पिछले साल अक्टूबर में नेपाली और चीनी सरकारों ने  हिमालयी राज्य की यात्रा के दौरान 2.75 बिलियन डॉलर की ट्रांस-हिमालयन परियोजना शुरू की थी। नेपाल में BRI परियोजनाओं से परिचित लोग इस बात की चिंता जाहिर करते हैं कि चीन आगे काठमांडू को ऋण-जाल में डुबो देगा। इसके साथ ही पिछले साल अक्टूबर में चीन ने नेपाल को लगभग 500 मिलियन डॉलर की सहायता दी।

नेपाल के कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार देश की कुल 10 जगहों पर चीन ने कब्जा कर लिया है। यही नहीं पेइचिंग ने 33 हेक्टेयर की नेपाली जमीन पर नदियों की धारा बदलकर प्राकृतिक सीमा बना दी है और कब्जा कर बैठा है। नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार ने चीन के इस कदम पर चुप्पी साध ली है।

अखबार में प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली  पर भी सवाल खड़े किये हैं कि चीन से गांव लेने में वे भारत से जारी सीमा विवाद जैसी तत्परता नहीं दिखा रहा हैं। अख़बार के मुताबिक, चीन ने नेपाली सीमा में स्थित इस गांव में अपने पिलर भी लगा दिए हैं और नेपाली सरकार ने इसके खिलाफ विरोध दर्ज कराना भी ज़रूरी नहीं समझा। इस गोरखा जिले के राजस्व विभाग के दफ्तर में भी गांववालों से रेवेन्यू वसूले जाने के दस्तावेज मौजूद हैं।

राजस्व अधिकारी ठाकुर खानल ने अखबार से बताया कि ग्रामीणों से रेवेन्यू वसूलने के दस्तावेज अभी भी फाइल में सुरक्षित रखे हैं। अन्नपूर्णा पोस्ट के मुताबिक नेपाल यह इलाका कभी भी चीन से जंग के दौरान नहीं हारा और ना ही दोनों देशों के बीच ऐसा कोई विशेष समझौता हुआ था। यह केवल सरकारी लापरवाही का नतीजा है।

नेपाल भारत के साथ नए क्षेत्रों के लिए लड़ता है, लेकिन उसका अपना घर अव्यवस्थित है। चीन ने रुई गांव पर कब्‍जा कर लिया है। नेपाल में पीएम ओली के नेतृत्व वाली कम्युनिस्ट सरकार अवैध रूप से चीन के कब्जे वाले रुई गांव पर दावा करने में असमर्थ है और उसे तिब्बत क्षेत्र में जोड़ा गया है। गोरखा के रुई गांव में 72 घर शामिल हैं। यह नेपाल का हिस्सा था, लेकिन बीजिंग अब इसे अपने क्षेत्र का हिस्सा बनाने का दावा कर रहा है।

नेपाल को लोबसांग सांगे की सलाह माननी चाहिए अन्यथा चीन को तिब्बत 2.0 को अपनी मुट्ठी में रखने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।

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