दिल्ली दंगे: कैसे मिली आरोपी फिरोज खान को बेल,कोर्ट ने नकारी कांस्टेबल विकास की गवाही,पढ़िए खबर|NewsRedbull

Picture Courtesy From Social Media :File Picture : दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में एक आरोपी को जमानत पर रिहा करते हुए, दिल्ली हाई कोर्ट ने बेल के उस सिद्धांत को दोहराया है जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जा रहा है.

By : News RedBull | Published On: Jun 04, 2020 |
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दिल्ली दंगे: कैसे मिली आरोपी फिरोज खान को बेल,कोर्ट ने नकारी कांस्टेबल विकास की गवाही,पढ़िए खबर|NewsRedbull

दिल्ली : Online Desk // Law Desk // NewsRedbull//उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी में हुए दंगों से संबंधित एक मामले में एक आरोपी को दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया है. ये अपने आप में कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन जिस मामले में यह व्यक्ति आरोपी है और उसे दोषी सिद्ध करने के लिए दिल्ली पुलिस और सरकारी पक्ष ने जो सबूत, गवाह और दलीलें दी हैं, वो चौंकाने वाले हैं. जमानत की अर्जी मंजूर करते हुए हाईकोर्ट के जज की टिप्पणी ने इन सब की परतें खोल दीं.

Indien Neu Delhi | Unruhen durch Proteste für und gegen neues Gesetz zur Staatsbürgerschaft (Reuters/P. De Chowdhuri)

FILE PICTURE

मामला 24 फरवरी का है. मुस्तफाबाद के न्यू महालक्ष्मी एन्क्लेव में मिठाई की दुकान चलाने वाले मोहम्मद शाहनवाज की दुकान को 200-250 लोगों की एक भीड़ ने जला डाला था. शाहनवाज की जिस शिकायत पर दयालपुर थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई उसमें उन्होंने किसी का भी नाम नहीं लिया. दिल्ली पुलिस ने एक महीने बाद इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया- मोहम्मद अनवर और फिरोज खान.

अविश्वसनीय सबूत, संदिग्ध गवाह

अनवर को निचली अदालत से पहले ही जमानत मिल चुकी है. फिरोज खान अभी तक जेल में थे क्योंकि दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल विकास का दावा था कि वो खुद घटना के चश्मदीद गवाह थे और उन्होंने फिरोज को शाहनवाज की दुकान को जलाते हुए अपनी आंखों से देखा था. मामले में एक सीसीटीवी कैमरे की फुटेज को भी सबूत के तौर पर पेश किया गया.

कांस्टेबल विकास के चश्मदीद गवाह होने पर संदेह व्यक्त करते हुए, जस्टिस अनूप भंभानी ने कहा कि शाहनवाज ने अपनी शिकायत में ये लिखवाया है कि घटना के समय उन्होंने कई बार पुलिस को फोन किया लेकिन उन्हें पुलिस से कोई मदद नहीं मिली.

जज ने पूछा कि अगर कांस्टेबल विकास वाकई वहां मौजूद होते तो शाहनवाज को पुलिस को बार बार फोन कर के बुलाने की जरूरत क्यों पड़ती? शिकायतकर्ता के बयान और कांस्टेबल विकास के दावे में इस विसंगति की वजह से अदालत ने कांस्टेबल की गवाही को मानने से मना कर दिया.

Indien Neu Delhi | Unruhen durch Proteste für und gegen neues Gesetz zur Staatsbürgerschaft (Reuters/A. Abidi)

File Picture 

रही बात सीसीटीवी फुटेज की

इस पर अदालत का कहना था कि फुटेज जिस स्कूल के बाहर लगे कैमरे की है वो शाहनवाज की दुकान से करीब 400 मीटर दूर सड़क के दूसरी तरफ स्थित है और इतनी दूर से कैमरा दुकान को देख सके ये अविश्वसनीय लगता है.

CCTV Camera

फैसले में कोर्ट ने दिया यह सन्देश 
अदालत ने गवाह और सबूत के साथ आरोपी की हिरासत बरकरार रखने के लिए सरकार की तरफ से दी गई दलील को भी ठुकरा दिया. सरकार की दलील थी कि अगर मामले के इस शुरूआती चरण में ही आरोपी को जमानत दे दी गई तो इस से समाज में प्रतिकूल संदेश जाएगा क्योंकि इस तरह के जुर्म राष्ट्रीय राजधानी में होने नहीं दिए जा सकते हैं.

Virtual courts: How real? - The Sunday Guardian Live

इस बिंदु को भी ठुकराते हुए, जस्टिस भंभानी ने कहा, "ये जमानत को ठुकराने का आधार नहीं हो सकता अगर अदालत को ये विश्वास है कि आरोपी को न्यायिक हिरासत में रखे रहने से जांच और अभियोजन में किसी भी तरह की मदद मिलेगी".

उन्होंने यह भी कहा, "कारावास दोषियों को सजा देने के लिए होता है ना कि अंडरट्रायलों को बंद रख कर समाज को कोई 'संदेश' देने के लिए. अदालत का काम है कानून के मुताबिक न्याय करना, ना की समाज को 'संदेश' भेजना".

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