नेपाल को लेकर गलत खबर चलायी थी आजतक ने: Nepal अडिग,बताया अपना हिस्सा,पढ़िए खबर|NewsRedbull

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By : News RedBull | Published On: May 31, 2020 |
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नेपाल को लेकर गलत खबर चलायी थी आजतक ने: Nepal अडिग,बताया अपना हिस्सा,पढ़िए खबर|NewsRedbull

नई दिल्ली/ काठमांडू //ऑनलाइन डेस्क NewsRedbull//  नेपाल और भारत‌ के बीच‌ चल रहे सीमा विवाद में नेपाल के तरफ से एक और विवादास्पद फैसला किया गया है. नेपाल सरकार ने नेपाल प्रवेश करने के लिए खुली सीमाओं को बंद करने और सरकार द्वारा निर्धारित सीमा क्षेत्र से ही नेपाल में एंट्री देने का फैसला किया है.

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भारत के साथ तनाव को देखते हुए नेपाल ने अपने सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की तैनाती को भी मंजूरी दी है. ऐसा पहली बार हो रहा है. इससे पहले आजतक न्यूज़ चैनल ने खबर चलाई थी कि नेपाल ने नेपाली संसद में संसद में संविधान संशोधन बिल रोक दिया है जबकि सच ये है कि बिल ने नक्शा और नेपाली सीमा को ठीक प्रकार से दर्शाने के लिए बिल कुछ दिन के लिए रोका गया था.

भारत की जनता को मूर्ख बनाने और मोदी सरकार खुश करने के लिए आजतक न्यूज़ चैनल ने खबर चला दी कि नेपाल ने इस मुद्दे पर अपने पैर वापस खीच लिए है जबकिऐसा बिलकुल नहीं था .

नेपाल के न्यूज़ चैनलों और ऑनलाइन पोर्टलो ने आजतक की इसतरह की झूठी खबर चलाने की निंदा की थी और लगातार ऐसी खबर चलने का विरोध किया है.

भारतीय न्यूज़ चैनल, आज तक ने भारत की जनता से मूल खबर छिपाकर मनगढ़ंत खबर चला दी और भारत की जनता को विश्वास दिलाया कि मोदी सरकार के दबाव में नेपाल झुक गया है. 

सीमा विवाद को सुलझाने के लिए भारत को ...

- नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा से इस संधि के खिलाफ रही है. इनके चुनावी घोषणा पत्र से लेकर हर सभा सम्मेलन में आजाद भारत के साथ हुए पहले समझौते का विरोध किया जाता रहा है.

-कम्युनिस्ट नेताओं का एक बड़ा एजेंडा‌ भारत के साथ रहे सांस्कृतिक, धार्मिक, पारिवारिक और राजनीतिक संबंधों को खत्म करना रहा है.

- नेपाल भारत के बीच बॉर्डर को नियंत्रित करना, बन्द करना और सेना की तैनाती करना दोनों देशों के बीच 1950 में हुए मैत्री संधि के खिलाफ है.

- 1 जून से अगर सीमाओं को खोला भी जाता है तो नेपाल के नए नियम के मुताबिक भारतीय नागरिक अब सिर्फ तय नाका से ही नेपाल में प्रवेश कर सकेंगे.

-नेपाल सरकार के निर्णय से सबसे अधिक परेशानी सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को ही होने वाली है. 

-नेपाल के 22 जिलों की सीमा भारत से जुड़ी है. सरकार ने सिर्फ 20 जिलों के लिए एक-एक एंट्री प्वाइंट तय किए हैं.

-नेपाल के नए संविधान में भारतीय लड़कियों ‌के नेपाल में शादी होने पर उन्हें राजनीतिक अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है. यह नियम लगाकर पारिवारिक रिश्तों को खत्म करने योजना बनाई गई है.

-नेपाल कभी पशुपतिनाथ के पुजारी को हटाने के बहाने तो कभी भारत के चारधामों और कुम्भ को न मानने के बहाने धार्मिक रिश्तों पर चोट पहुंचा रहा है. 

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क्यों जारी है सीमा विवाद

सुगौली संधि, ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के राजा के बीच हुई एक संधि है, जिसे 1814-16 के दौरान ब्रिटेन और नेपाल के बीच हुए युद्ध के बाद हरकत में लाया गया था. इस पर 02 दिसम्बर 1815 को हस्ताक्ष्रर किये गये. 4 मार्च 1816 का इस पर मुहर लग गई. नेपाल की ओर से इस पर राज गुरु गजराज मिश्र और कंपनी ओर से लेफ्टिनेंट कर्नल पेरिस ब्रेडशॉ ने हस्ताक्षर किए.

इस संधि में राष्ट्रीय परिसीमन को स्पष्ट नहीं किया गया, जिसके चलते आज भी इस पर विवाद होता रहता है, नेपाल और भारत दोनों कुछ इलाकों पर अपना हक जताते हैं.
1. संधि ये बताने में विफल रही कि कुछ स्थानों पर एक स्पष्ट वास्तविक सीमा रेखा कहां से गुजरेगी. विवादित स्थानों का क्षेत्रफल लगभग 60,000 हेक्टेयर है.

2. नेपाल-भारत की सीमा रेखा के 54 स्थानों पर अतिक्रमण और विवादों के आरोप हैं.

3. संधि के बाद दिसम्बर 1816 में नेपाल को मेची नदी के पूर्व और महाकाली नदी के पश्चिम के बीच का तराई क्षेत्र वापस लौटा दिया गया.

एक भूमि सर्वेक्षण के द्वारा दोनों राष्ट्रों के बीच की सीमा को तय करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया था. (हालांकि इसको लेकर दोनों देशों के बीच आजादी के बाद से ही स्पष्टता नहीं बन सकी है. हालांकि इन इलाकों पर भारत का कब्जा बना हुआ है)

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चीन के इशारों पर भारत-नेपाल सीमा ...
 

नेपाल और भारत के बीच करीब 1,700 किलोमीटर की खुली सीमाएं हैं. अभी तक नेपाल आने वाले भारतीय नागरिकों को बिना रोक-टोक अपनी सुविधा के मुताबिक इन खुली सीमाओं से एंट्री मिलती थी. नेपाल सरकार के ताजा फैसले से अब सिर्फ निर्धारित सीमा से ही नेपाल में प्रवेश करने की इजाजत मिलेगी.

नेपाल पीएम का भारत के साथ सीमा विवाद ...

जिस दिन नेपाल सरकार ने भारतीय क्षेत्रों को मिलाकर अपना नया नक्शा जारी किया था, यह निर्णय उसी दौरान लिया गया है. लेकिन सरकार ने एक हफ्ते तक इस निर्णय को छिपा कर रखा. राजपत्र में प्रकाशित करने के बाद इसे सार्वजनिक किया गया है.

सीमा विवाद को लेकर भारत से टकराव के मूड में रहे नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली की कैबिनेट ने सीमा व्यवस्थापन और सुरक्षा के नाम पर सख्ती दिखाते हुए भारत से लगी 20 सीमाओं को छोड़कर बाकी सभी को बन्द करने का निर्णय किया है.

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नेपाल सरकार के नए नक्शे में भारत के कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को भी शामिल करने पर भारत को आपत्ति है. नेपाल कैबिनेट की बैठक में भूमि संसाधन मंत्रालय ने नेपाल का यह संशोधित नक्शा जारी किया था. जिस वक्त यह नक्शा जारी किया गया, उस वक्त मौजूद कैबिनेट सदस्यों ने इस नक्शे में समर्थन में मत दिया था. वहीं भारत ने तत्काल आपत्ति जताई थी.

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