3500 साल बाद खुला मिस्र की बेहद खूबसूरत महारानी नेफरतिती के मकबरे का राज! NewsRedbull

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By : News RedBull | Published On: May 26, 2020 |
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3500 साल बाद खुला मिस्र की बेहद खूबसूरत महारानी नेफरतिती के मकबरे का राज! NewsRedbull

नई दिल्ली। Online Desk कई बार इतिहास के कुछ रहस्य किताबों और खोज की दुनिया से निकल कर हमारी दुनिया में आ खड़े होते हैं। ऐसा ही एक अनसुलझा रहस्य है मिस्र की उस ममी का जिसकी तलाश 100 बरस से हो रही है। वो लापता ममी उस खूबसूरत महारानी नेफरतिती की है, जिसकी मूर्ति 1912 में जर्मन पुरातत्वविदों को मिली थी। इसके 10 साल बाद प्राचीन मिस्र के सबसे चर्चित सम्राट-फराओ तूतनखामेन के मकबरे में उसकी ममी को खोजा गया। और अब 100 साल बाद तूतनखामेन और नेफरतिती के रिश्ते को साफ कर देने वाली सबसे बड़ी खोज ने बेनकाब कर दिया है ममी का रहस्य।

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एरिजोना यूनिवर्सिटी के ब्रिटिश पुरातत्वविद् ने आधुनिक तकनीक की मदद से प्राचीन मिस्र की सबसे खूबसूरत महारानी नेफरतिती की कब्र खोज निकालने का दावा किया है। नेफरतिती की कब्र कहीं और नहीं बल्कि उसी मकबरे में हैं जहां 100 साल पहले तूतनखामेन की ममी मिली थी।

नेफरतिती बला की खूबसरत थी, उसकी खूबसूरती के किस्से प्राचीन मिस्र की कथाओं में आज भी मिलते हैं। उसकी मौत 1340 ईसापूर्व में हुई थी। वो महान फराओ अखनातन की तमाम रानियों के बीच महारानी थी। इसके बावजूद आज तक नेफरतिती का मकबरा नहीं तलाशा जा सका। इस रहस्य ने बरसों से इतिहासकारों को उलझा रखा है।

करीब 93 साल पहले 1922 में ब्रिटिश पुरातत्ववेत्ता हॉवर्ड कार्टर ने फराओ तूतनखामेन के मकबरे में उसकी ममी को खोज निकाला था। प्राचीन मिस्र के लोग अपने राजाओं की मौत पर उनके शरीर को खास तरह के लेप से सुरक्षित कर दफना देते थे। साथ में उनके इस्तेमाल की चीजें और रक्षकों को भी दफना दिया जाता था।
इसीलिए जब तूतनखामेन के मकबरे की खुदाई हुई तो वहां से सोने और हाथी दांत से बने आभूषणों का जखीरा मिला था। तूतनखामेन की ममी ने तावीज पहन रखा था और उसका चेहरा सोने से बने एक मास्क से ढंका हुआ था।

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साल 2007 में दुनिया के सामने इस मास्क के पीछे छुपा तूतनखामेन का चेहरा भी पहली बार दुनिया के सामने आया, जब उसकी ममी को सम्राटों की घाटी से बाहर निकाल कर कांच के एक खांचे में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखा गया। शायद तब से ही माना जाता है कि तूतनखामेन से जुड़ा शायद ही कोई राज दुनिया के सामने आने से बाकी रह गया है, लेकिन रहस्यों से लिपटी इस सदियों पुरानी दास्तान का अब नया रहस्य भी सामने आ गया है।
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एरिजोना यूनिवर्सिटी के ब्रिटिश पुरातत्वविद् डॉक्टर निकोलस रीव्स ने ये दावे तूतनखामेन के मकबरे की दीवारों की हाई रेज्यूलूशन फोटो के विश्लेषण के बाद किया है। इन तस्वीरों को स्पेन की कला संस्था फैक्टम आर्टे ने तैयार करवाया था। इन्हीं तस्वीरों का अध्ययन करते हुए डॉक्टर रीव्स तब चौंक पड़े जब उन्हें मकबरे की दीवारों के प्लास्टर के पीछे एक छुपा हुआ दरवाजा नजर आया। इसके बाद रीव्स ने एक रिसर्च रिपोर्ट तैयार कर अमारना रॉयल टोंब प्रोजेक्ट को सौंपी जिसमें दावा किया गया कि तूतनखामेन के मकबरे के साथ ही नेफरतिती का मकबरा भी है।

डॉक्टर रीव्स ने बकायदा सबूत के साथ कहा है कि तूतनखामेन की कब्र के पास दो गुप्त दरवाजे हैं। एक दरवाजा प्राचीन गोदाम का है। कब्र के उत्तर दिशा का दूसरा दरवाजा नेफरतिती की कब्र का है। ये कब्र उस मकबरे का हिस्सा है जिसे खासतौर से नेफरतिती के लिए बनाया गया था।

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यानी मुमकिन है कि तूतनखामेन के मकबरे के साथ ही नेफरतिती का मकबरा भी हो। डॉक्टर रीव्स को इसके नेफरतिती के मकबरे का होने का पक्का यकीन इसलिए है क्योंकि प्राचीन मिस्र में प्रवेश द्वार के दाहिनी तरफ सम्राटों के बजाय महारानियों का मकबरा तामिल किया जाता था। ये खोज तूतनखामेन और महारानी नेफरतिती के उस रिश्ते का रहस्य भी खोल सकती है, जिसने बरसों से इतिहासकारों को उलझाए रखा है। तूतनखामेन और नेफरतिती के बीच क्या रिश्ता था-इस पर इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ इतिहासकारों का दावा है कि नेफरतिती ही तूतनाखामेन की मां थी इस दावे को नई खोज ने कैसे मजबूत कर दिया है।
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सुनहरे मुखौटे के पीछे छुपा तूतनखामेन का चेहरा कैसा था अब ये दुनिया जानती है। 1968 में तूतनखामेन की ममी का एक्सरे किया गया था। साल 2005 में तूतनखामेन की मम्मी का सीटी स्कैन कर उसकी तीन अलग-अलग कोण से तस्वीर ली गई थी। आधुनिक विज्ञान की ऐसी तमाम तकनीक का इस्तेमाल करने के बाद अब पता लगाया जा चुका है कि प्रचीन मिस्र का सबसे चर्चित सम्राट कैसा दिखता था।

लेकिन नेफरतिती कैसी दिखती थी ये जानने के लिए इतिहासकारों के पास सिर्फ एक बुत है। बर्लिन नेउस म्यूजियम में रखे इस बुत को ईसा से 1300 साल पहले एक कलाकार ने बनाया था। हालांकि अब प्राचीन मिस्र में अपने पति अखनातन के साथ राज करने वाली महारानी की असली तस्वीर भी सामने आ सकती है।

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एरीजोना यूनिवर्सिटी के ब्रिटिश पुरातत्वविद् डॉक्टर निकोलस रीव्स का दावा अगर सच है तो संभव है कि पुरातत्वविदों को तूतनखामेन की कब्र के बगल के गुप्त कमरे में नेफरतिती की ममी भी मिल जाए। अगर ऐसा होता है तो नेफरतिती और तूतनखामेन के रिश्ते की पहेली भी सुलझ जाएगी-जिसने बरसों से इतिहासकारों को उलझा रखा है। दरअसल, इतिहासकार ये सवाल बरसों से पूछते आए हैं कि तूतनखामेन का मकबरा बाकी सम्राटों के मुकाबले छोटा क्यों है? महान तूतनखामेन को बड़े सम्राटों जैसा सम्मान क्यों नहीं मिला -तूतनखामेन के मकबरे में पुराने सामान क्यों रखे गए थे?
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तूतनखामेन के मकबरे की खोज के बाद वहां से करीब 2000 से ज्यादा पुरातात्विक सामान मिले थे, लेकिन अधय्यन के बाद माना जाता है कि ज्यादातर नए नहीं थे। अपने फेराओ तूतनखामेन के साथ प्राचीन मिस्र वासियों ने ऐसा क्यों किया? इस सवाल का जवाब डॉक्टर रीव्स का दावा सच साबित होने के बाद मिल सकता है, जिसका कहना है कि तूतनखामेन को अपनी मां के मकबरे में दफनाया गया था ये मकबरा किसी और का नहीं नेफरतिती का है।

हालांकि इतिहासकारों में इस बात पर मतभेद है कि क्या नेफरतिती ही तूतनखामेन की मां थी, लेकिन नई खोज के बाद ये थ्योरी अब और मजबूत हो गई है। दरअसल तूतनखामेन की मां कौन थी इसे लेकर दो अलग-अलग थ्योरियां हैं। डीएनए जांच के आधार पर एक थ्योरी का दावा है कि तूतनखामेन की मां उसके पिता अखनातन की रिश्ते की बहन थी, जिससे उसने शादी कर ली थी। लेकिन दूसरी थ्योरी कहती है कि दरअसल तूतनखामेन की अखनातन की महारानी नेफरतिती ही थी। तूतनखामेन दोनों के 6 बच्चों में से एक था।

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माना जाता है कि नेफरतिती अपने अखिरी बरसों में तूतनखामेन की संरक्षक के तौर पर राज कर रही थी इसीलिए तूतनखामेन को नेफरतिती के मकबरे के बगल में ही दफनाया गया। इसीलिए तूतनखामेन को पुराने सामानों के साथ दफनाया गया। माना जा रहा है कि तूतनखामेन के मकबरे में जहां नेफरतिती की कब्र होने की उम्मीद है, उस दरवाजे को धार्मिक चिन्हों से सजाया गया है। प्राचीन मिस्र में ये सम्मान आमतौर पर महिलाओं को नहीं दिया जाता था, लेकिन नेफरतिती अकेली महारानी है जिसे ये सम्मान दिया गया, क्योंकि वो बला की खूबसूरत थी।
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नेफरतिती ईसा पूर्व 1370 से 1330 वर्ष तक मिस्र में रही। कई देवी-देवताओं को मानने वाले प्राचीन मिस्र ने नेफरतिती की धार्मिक क्रांति के बाद ही सिर्फ सूर्य देवता की पूजा करनी शुरू कर दी थी। .फराओ अखनातन की महारानी के बारे में माना जाता है कि वो खुद भी एक फराओ की ही बेटी थी। अनुमान है कि नेफरतिती की मौत टीबी या प्लेग की व्रुाह से हुई थी। आप देख रहे हैं स्पेशल रिपोर्ट, हम बात कर रहे हैं प्राचीन मिस्र के इतिहास से जुड़े सबसे बड़े रहस्य पर हुए नए खुलासे की। इस खुलासे के मुताबिक तूतनखामेन के मकबरे में एक और मकबरा है।

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वहां एक और कब्र है जो प्राचीन मिस्र की सबसे खूबसूरत रानी नेफरतिती की है। मगर, सवाल है कि कौन करेगा तूतनखामेन के मकबरे की खुदाई? क्योंकि ये मशहूर है कि यहां खुदाई करने वाले अपनी मौत से नहीं बल्कि तूतनखामेन के श्राप से मर जाते हैं।

तूतनखामेन के मकबरे के बारे में एरिजोना यूनिवर्सिटी के ब्रिटिश पुरातत्वविद् के नए दावों के बाद ये सवाल भी खड़ा हो गया कि क्या उसके गुप्त दरवाजों को खोला जाएगा? क्या मकबरे के गुप्त दरवाजों की खुदाई कर खूबसूरत महारानी नेफरतिती की ममी भी बाहर निकाली जाएगी, लेकिन सवाल ये है कि ऐसी हिम्मत कौन पुरातत्वशास्त्री करेगा, क्योंकि तूतनखामेन के श्राप का डर हर किसी को सताता है। ये मानने वालों की कमी नहीं है कि तूतनखामेन के श्राप की वजह से ही उसके मकबरे में घुसने वालों की मौत हो जाती है।

दरअसल, तूतनखामेन-प्राचीन मिस्र का वो फराओ था, जिसके बारे में कहा जाता था कि उसने बीता हुआ कल देखा है, और उसे आने वाले कल का भी पता है। महज 9 साल की उम्र में फराओ यानी सम्राट बन जाने वाले और 19 साल की उम्र में मर जाने वाले तूतनखामेन कैसा था-वैज्ञानिक जांच से ये भी पता चल चुका है। उसका पेट निकला हुआ था, रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाने के कारण उसकी कमर बाहर की तरफ निकली हुई थी और पैर टेढ़े थे। डीएनए टेस्ट से पता चला कि उसकी मौत मलेरिया से हुई थी। शायद इसीलिए तूतनखामेन को जब दफनाया गया तो उसकी ममी को सोने से बने तीन बक्सों में सुरक्षित कर दफनाया था-ताकि कोई उसे देख न सके।

इसीलिए, कहा जाता है कि तूतनखामेन के मकबरे की खुदाई करने वाली इतिहासकार की टीम तूतनखामेन श्रपा का शिकार हो गई। 1922 में तूतनखामेन के मकबरे में जाने वालों में सबसे पहले थे पुरातत्वविद् हॉवर्ड कार्टर और उनके साथी लार्ड कार्नरवान। दुनिया भर के मीडिया में उसी वक्त से तूतनखामेन के श्राप की चर्चा होने लगी थी, और इसे तब मजबूती मिल गई जब 5 अप्रैल 1923 को कायरो में लार्ड कार्नरवान की मौत हो गई। 16 मई 1923 को ही मकबरे में जाने वाले एक और शख्स जॉर्ज गाउल्ड की भी मौत हो गई।

27 सितंबर 1923 को ही लार्ड कार्नरवान के सौतेले भाई की भी मौत हो गई। 1923 में ही कार्टर को मकबरे की खोज के लिए पैसा देने वाले वूल्फे जूले की लाश नील नदी में मिली। 1925 में मकबरे में काम करने वाले जॉर्ज बेनेडिट की मौत भी हार्ट अटैक से हो गई। कुल मिलाकर प्रोजेक्ट से जुड़ी 11 मौतों के पीछे तूतनखामेन के श्राप को जिम्मेदार बताया जाता है।

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हालांकि बहुत से लोग इसे सिर्फ अंधविश्वास ही मानते हैं, लेकिन 1986 में एक फ्रांसीसी रिसर्चर कौरोलीन स्टेन फिलिप ने इसका वैज्ञानिक कारण देने की कोशिश की। कौरोलीन ने अपनी खोज में पाया कि प्राचीन काल में जिस लेप से तूतनखामेन की कब्र को सील करने के लिए जिन चीजों का इस्तेमाल किया गया, वो वक्त के साथ सड़ चुके थे। उनमें बीमारी फैलाने वाले फंगस और स्पोर्स पैदा हो गए थे और शायद यही कारण है कि तूतनखामेन के मकबरे में प्रवेश करने वाले बहुत से लोगों की मौत जानलेवा बीमारियों से हो गई, लेकिन खुद हावर्ड कार्टर 60 साल से ज्यादा उम्र तक जीते रहे।

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