कश्मीर की अंतिम हिन्दू रानी जो झांसी रानी और पद्मावती का मिलाजुला रूप थी,इतिहास के झरोखे से|NewsRedbull

Picture Courtesy From Social Media : कोटा रानी पर राकेश कौल ने एक किताब लिखी है, द लास्ट क्वीन ऑफ कश्मीर.

By : News RedBull | Published On: May 01, 2020 |
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कश्मीर की अंतिम हिन्दू रानी जो झांसी रानी और पद्मावती का मिलाजुला रूप थी,इतिहास के झरोखे से|NewsRedbull

Online Desk NewsRedbull // कश्मीर की ये कोटा रानी है कौन. कश्मीर के मुस्लिम राज्य बनने से पहले वो यहां की आखिरी हिंदू रानी थीं. इतिहास में जिनके बारे में लिखा है कि उन्होंने अपने राज्य की सत्ता में बने रहने के लिए उन्होंने अपने पिता के हत्यारे से ही शादी रचा ली थी.

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कोटा रानी की कहानी खासी रोमांचक है 

वह बहादुर थीं तो साहसी भी लेकिन सत्ता में बने रहने के लिए उसने बहुत कुछ किया. सत्‍ता में बने रहने के लिए उसने पहले अगर पिता के हत्‍यारे रिंचिन से शादी रचाई तो उसके बाद फिर सत्ता पर काबिज होने वाले देवर को खुद को समर्पित कर दिया. कहा जाता है कि वह अपने दुश्‍मनों को जहर देकर मरवा देती थीं. हालांकि बाद में रानी ने आत्‍महत्‍या कर ली.

कोटा रानी के बारे में कहा जाता है कि उसने साम दाम दंड भेद, हर तरह की नीति का पालन किया. रानी कोटा को लेकर
बॉलीवुड एक बॉयोपिक भी बना रहा है.

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कश्मीर 12वीं शताब्दी तक हिंदू राष्ट्र था मगर हालात बदलने लगे थे. 1301 में कश्मीर में सहदेव नामक शासक गद्दी पर बैठा. उसके दो खास सहयोगी थे, रिंचिन और दूसरा स्वात घाटी से आया शाहमीर. रिंचिन लद्दाख का विद्रोही राजकुमार था. सहदेव का सेनापति था राम चंद्र. कोटा रानी इसी रामचंद्र की बेटी थीं.

कहानी कश्मीर की कोटा रानी की, जो झांसी की रानी और पद्मावती का मिलाजुला रूप थी

रिंचित ने कर दिया पिता का कत्ल और गद्दी हथिया ली
1319 में राजा सहदेव पर तातार ने बड़ा हमला किया. इस आक्रमण के दौरान राजा सहदेव अपने भाई उदयन देव के साथ भाग गया. हालांकि तातार सेना जब जीत हासिल करके लौट रही थे बर्फ के तूफान में फंसी और सभी की मौत हो गई.

तब रामचंद्र ने खुद को कश्मीर का राजा घोषित किया. कुछ समय बाद ही रिंचिन ने विद्रोह किया और रामचंद्र का धोखे से कत्ल कर दिया.

बौद्ध राजा, हिंदू होना चाहा, मुसलमान हो गया

रिनचन बौद्ध था. उसने सोचा, हिंदू हो जाए तो प्रजा ज्यादा कनेक्टेड महसूस करेगी. रिनचन ने हिंदू धर्म अपनाने की कोशिश की. मगर कश्मीरी पंडित राज़ी नहीं हुए. इसके बाद रिनचन को मिले बुलबुल शाह. इस्लाम के प्रचारक. उनके असर में रिनचन मुसलमान हो गया. टाइटल रखा, सुल्तान सदर-उद-दीन. और इस तरह कश्मीर को अपना पहला मुस्लिम शासक मिला.

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कोटा रानी ने रचाई पिता के कातिल से शादी
अब रिंचिन कश्मीर का राजा था. कोटा रानी ने पिता के कातिल से शादी रचा ली और वहां की रानी बन गई. कहा जाता है कि इस विवाह का प्रस्ताव कोटा रानी की ओर से दिया गया था. असल में राजा रिंचिन जरूर था लेकिन राज रानी का ही था. रानी काफी बुद्धिमान और दूरदर्शी थी. कूटनीति में उसका जवाब नहीं था. वो साम-दाम-दंड और भेद में निपुण थी.


रानी संभालने लगी राजकाज
जब कश्मीर का राज्य ठीक चल रहा था तभी पूर्व राजा सहदेव के भाई उदयन देव ने बड़ी सेना के साथ हमला किया. इस लड़ाई में उदयन जीत तो नहीं सका लेकिन रिंचिन बुरी तरह घायल हुआ और उसी वजह से उसकी मृत्यु भी हो गई. रिंचिन की मृत्यु के बाद उसका बेटा हैदर छोटा था. लिहाजा राज्य का सारा राजकाज कोटा रानी संभालने लगी.

रानी को फिर देवर की रानी बनने से भी गुरेज नहीं था
कहा जाता है इसके बाद उदयन ने फिर हमला किया. अबकी रानी ने खुद के साथ राज्य
का भी समर्पण कर दिया. कोटा रानी को अब उसकी पत्नी बनने में कोई गुरेज नहीं था. हालांकि धीरे धीरे पूरा प्रशासन वो ही संभालने लगी थी. उसके दो विश्वासपात्र थे, एक था उसका भाई भिक्षण भट्ट और दूसरा शाहमीर.

 

कोटा रानी ने कश्मीर में कई मंदिर बनवाए, उसके अवशेष आज भी मौजूद हैं.
रानी के बारे में कहा जाता है वो तेज बुद्धि वाली और साम-दाम-दंड-भेद में खासी निपुण थी.
सत्ता का केंद्र हमेशा उसके चारों ओर ही घूमता रहता था

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रानी से भाषण से जोश में आई सेना और हार को बदला जीत में 
मगर जल्द ही कश्मीर फिर एक बड़े आक्रमण से दहलने वाला था. तातार सेना ने फिर बड़ा आक्रमण किया. हमला जबरदस्त था. उदयन इन हालात में पत्नी और राज्य को छोड़कर भाग गया. रानी भागी नहीं, उसने सेना को जोशीला भाषण दिया. जीत का जूनून पैदा किया. जिससे सेना पूरे जोश से लड़ी. रानी के आह्वान पर जनता भी लड़ाई में आ डटी. तातारों को हार का मुंह देखना पड़ा.

खतरा टलने के बाद उदयन देव वापस आया. हालांकि 1341 में उदयन देव की मृत्यु हो गई. कश्मीर पर फिर खतरा मंडराने लगा. उस समय कोटा रानी और उदयन देव का बेटा छोटा था, रानी ही राजकाज संभाल रही थी. इस समय तक रानी के खास सहयोगी शाहमीर में कश्मीर का पहला मुस्लिक शासक होने की इच्छाएं जागने लगीं थीं.

फिर शाहमीर हथिया राज्य और रानी से किया निकाह
शाहमीर ने पहले रानी के भाई भिक्षण भट्ट की धोखे से हत्या कराई. फिर कोटा रानी के खिलाफ विद्रोह कर उसे पराजित किया. इस तरह कश्मीर पर इस्लामिक शासन काबिज हुआ. शाहमीर ने कोटा रानी को विवाह का प्रस्ताव दिया. उसे निकाह के लिए मजबूर भी कर दिया.

रानी पूरे सिंगार से आई और खंजर घोंप लिया
शादी के बाद वो रात में जब रानी का इंतजार कर रहा था तब कोटा रानी पूरे सिंगार में आई. रानी ने पेट में खंजर घुसेड कर आत्महत्या कर ली. उसके आख़िरी शब्द थे, “यह है मेरा जबाव!” रानी कश्मीर में हिंदू लोहारा राजवंश की आखिरी रानी थी. हालांकि कश्मीर में आज भी रानी की कहानियां खूब प्रचलित हैं.

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और शायद इसी अंत ने कोटा को अमर कर दिया. वो बला की हसीन थी. बहादुर थी. लीडर थी. हमलावरों के आगे पीठ नहीं दिखाई उसने. लोगों को एकजुट किया. कोटा ने अपनी प्रजा में धर्म का फर्क नहीं किया. जिसको कश्मीरियत कहते हैं, वो थी कोटा में. वो काबिल शासक थी. चतुर थी. जानती थी, कहां जोर चलाना है और कहां ख़ुद के आकर्षण से काम निकालना है.

इतिहास की किताबें एक से एक क्रूर पुरुषों से भरी हैं. जिन्होंने सत्ता के लिए, पावर के लिए कोई हद नहीं छोड़ी. इसी इतिहास में क्लियोपेट्रा और कोटा रानी भी हैं. जो शायद कई बार जज कर ली जाती हैं. उनके करेक्टर पर सवाल उठा दिया जाता है. पुरुषों की चालाकी कूटनीति कहलाती है.

क्लियोपेट्रा और कोटा रानी शातिर कहकर छोड़ दी जाती हैं. कश्मीरी कहानियों ने कोटा को ज़िंदा रखा. मगर उन्होंने भी अन्याय ये किया कि कोटा की कहानी में सबसे ज्यादा गौरव उसकी मौत को दिया.

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