गुड न्यूज़: Lockdown ने वो कर दिखाया है, जो पूरी दुनिया नहीं कर पाई ! NewsRedbull

Picture Courtesy From Social Media

By : News RedBull | Published On: Apr 08, 2020 |
230


गुड न्यूज़: Lockdown ने वो कर दिखाया है, जो पूरी दुनिया नहीं कर पाई ! NewsRedbull

World News Online Desk// NewsRedbull चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस का कहर पूरी दुनिया में फैल चुका है, जिसके बाद कई विकासशील देशों में लॉकडाउन हो गया है. ना परिवहन जारी है, ना ही कारखाने खुल रहे हैं. लॉकडाउन की शुरूआत भी चीन से हुई, फिर इटली और भारत समेत कई और देशों में भी कामकाज बंद हो गया.

प्रदूषण के बादल छंटने लगे हैं! Lockdown ...

लोग घरों में कैद हैं. सरकार सख्त है. ऐसे में क्या मजाल है कि कोई बाहर निकल जाए. बस ऐसे में सड़कें साफ हैं, पानी साफ है, हवा साफ है. नासा की एक रिपोर्ट की मानें तो दुनिया के ऊपर से प्रदूषण के बादल छंटने लगे हैं. जिन देशों में लॉकडाउन जारी है, वहां सबकुछ ठीक होता नज़र आ रहा है. 

नासा के सैटेलाइट से कुछ तस्वीरें आईं है, जिसमें कारों, बिजली संयंत्रों, उद्योगों से निकलने वाली जहरीली नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी देखी गई है. नासा ने ये तस्वीरें जारी करते हुए उम्मीद जताई है कि ये वो परिणाम हैं, जिन्हें देखने में हमें कम से कम एक दशक लगता, पर केवल 2 माह के भीतर ही प्रदूषण नियंत्रण में आ चुका है.

नासा ने जारी चित्रों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड के गिरते स्तर को दिखाया है. हालांकि, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने बयान में ये भी कहा कि इस बात के सबूत हैं कि कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद आर्थिक मंदी के कारण ही यह गिरावट देखने को मिली है. जो दुनिया की आर्थिक स्थिति के लिए भले ही खराब हो, लेकिन पर्यावरण के नज़रिए से शानदार है.

अपने बयान में नासा ने क्यू एयर की रिपोर्ट का भी जिक्र किया है. जिसके मुताबिक हॉटन और काशगर को दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों में माना जाता है. यहां साल 2005 और 2019 के बीच समान अवधि के दौरान नाइट्रोजन डाइऑक्साइड की दर औसतन 30 प्रतिशत कम थी. 

इसके पहले साल 2008 में ओलंपिक के दौरान बीजिंग के आसपास भी प्रदूषण में भारी गिरावट दर्ज की थी, लेकिन इसका प्रभाव ज्यादातर स्थानीय इलाके में ही था और ओलंपिक खत्म होने के बाद प्रदूषण का स्तर फिर से बढ़ गया था.

बात करें अपने देश की तो अच्छा असर तो यहां भी दिखाई दे रहा है. खासतौर पर देश के महानगरों में प्रदूषण स्तर अपने सबसे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है. जनता कर्फ्यू और देश के लॉकडाउन के बाद भारत का प्रदूषण स्तर करीब 25 फीसदी कम हुआ है.

कुछ जगहों पर तो ये 50 फीसदी से भी कम हो गया है. केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के दौरान ही वायु प्रदूषण से सर्वाधिक प्रभावित रहने वाले चार महानगरों दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और पुणे में हवा की गुणवत्ता बेहतर हुयी थी.

इन शहरों में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारकों (पीएम 10, पीएम 2.5 और एनओ) के उत्सर्जन में 15 से 50 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गयी है. पिछले 4 दिनों से जारी लॉकडाउन के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर देश के 104 प्रमुख शहरों में हवा की गुणवत्ता संतोषजनक स्तर पहुंच गयी है.

एक्यूआई के आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद में स्थिति सबसे अच्छी है. यानि दिल्ली की आवाम भले घरों में है पर वे साफ हवा में सांस ले रहे हैं. सिर्फ गुवाहाटी, कल्याण और मुजफ्फरपुर में हवा की गुणवत्ता का स्तर अभी भी ‘खराब’ श्रेणी में बना हुआ है.

विभाग ने कहा है कि चंडीगढ़, जलंधर, लुधियाना, कानपुर, खन्ना, कोटा, मानेसर, नारनौल, राजामहेन्द्रवरम, सतना, यादगीर, भिवंडी, हुबली, कैथल, दमोह, पटियाला, कोच्चि, कोझिकोड और उदयपुर में हवा की गुणवत्ता ‘अच्छी’ श्रेणी में दर्ज की गयी है. 

वाराणसी और ग्रेटर नोएडा सहित 14 शहरों में वायु गुणवत्ता सामान्य श्रेणी में पहुंच गयी है. पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की संस्था ‘सफर’ के मुताबिक वाहन जनित प्रदूषण में पीएम 10 के उत्सर्जन में 15 से 20 प्रतिशत और पीएम 2.5 के उत्सर्जन में 30 से 40 प्रतिशत की कमी आयी है. 

निर्माण एवं अन्य विकास कार्यों से उड़ने वाली धूल के कारण पीएम 10 के उत्सर्जन में 40 से 48 प्रतिशत और पीएम 2.5 के उत्सर्जन में 17 से 21 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी. साथ ही पिछले तीन दिनों से उत्तर पश्चिमी भारत में बारिश और तेज हवाओं ने प्रदूषण फैलाने वाले तत्वों को वातावरण में ठहरने से रोका है. नतीजतन हवा साफ हुई है.

कई वैज्ञानिक तो ये मान रहे हैं कि अगर एक माह तक पूरी दुनिया के यही लॉकडाउन जारी रहा तो जब हम घरों के बाहर निकलेंगे तो दुनिया सबसे ज्यादा साफ होगी.  

उम्मीद यहां तक की जा रही है कि ओजोन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाला चीन जब तक शांत है, तब तक इसके घाव भरते रहेंगे. 

यूनिवर्सिटी की रिसर्चर अंतरा बैनर्जी ने बताया कि यह एक अस्थाई बदलाव है. लेकिन अच्छा है. साल 2000 से पहले जेट स्ट्रीम पृथ्वी के बीचों-बीच घूमता रहता था. उसके बाद से ये पृथ्वी के दक्षिणी हिस्से की तरफ घूम गया. इससे ओजोन में छेद तो हुआ ही. ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के मौसम में भारी बदलाव आया.

जो भी हो, ये खबर है तो अच्छी. अगर आपने गौर किया हो तो अब आपकी छतों से तारों भरा आसमान साफ दिखाई देने लगा होगा. तो लॉकडाउन में अपने बच्चों को छत पर लेकर आएं और उन्हें आसमान के तारे दिखाएं, ​जो हमारी गलतियों के कारण कहीं छिप गए है.

Related News

Like Us

HEADLINES

एक सरकारी नौकरी मिलना मुश्किल:टीचर अनामिका यूपी के इतने जिलों में कर रही है नौकरी! हड़कंप|UP| | सपा MLA की सुरक्षा में लगे सिपाही ने खुद को गोली से उड़ाया,वजह जानकर हैरान रह जायेंगे आप!NewsRedbull | वाह रे समाज! इस कारण नौ साल की बेटी को देनी पड़ी पिता को मुखाग्नि,पढ़िए खबर|UP|NewsRedbull | महामारी का बढ़ता कहर: जानिए इस देश में अब अमेरिका से ज्यादा रोज़ाना फूट रहा कोरोना बम|Read More| | भारतीय क्रिकेटर ऋषभ पंत की बहन पर इस युवक ने लगाए कई गंभीर आरोप, मांगा इंसाफ… |