आखिर क्यों मनाया जाता है 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस', ये है पूरी कहानी |NewsRedbull

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By : News RedBull | Published On: May 01, 2019 |
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आखिर क्यों मनाया जाता है 'अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस', ये है पूरी कहानी |NewsRedbull

आज 1 मई को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जा रहा है. खास बात यह है कि इस दिन को पिछले 132 साल से मनाया जा रहा है. आज ही के दिन दुनिया भर के मजदूरों के अनिश्चित काम के घंटों को 8 घंटे में बदला गया था.

दरअसल, साल 1877 में मजदूरों ने अपने काम के घंटे तय करने की अपनी मांग को लेकर एक आंदोलन शुरू किया. जिसके बाद एक मई 1886 को पूरे अमेरिका में लाखों मजदूरों ने एकजुट होकर इस मुद्दे को लेकर हड़ताल की. इस हड़ताल में लगभग 11 हजार फैक्ट्रियों के 3 लाख 80 हजार मजदूर शामिल हुए.

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यहां से हुई थी इसकी शुरुआत-

अन्तर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत 1 मई 1886 को शिकागो से हुई थी. वहां के मजदूरों की मांग थी कि कि काम करने की अवधि आठ घंटे हो और सप्ताह में एक दिन की छुट्टी हो. इस दिन मजदूर हड़ताल पर थे. इस हड़ताल के दौरान अज्ञात शख्स ने बम फोड़ दिया उसके बाद पुलिस की ओर से की गई गोलाबारी में कुछ मजदूर मारे गए. 

उसके बाद  पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की द्वितीय बैठक में फ्रेंच क्रांति को याद करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया गया कि इसको अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाए, उसी समय से विश्व भर के 80 देशों में ‘मई दिवस’ को राष्ट्रीय छुट्टी के रूप में मान्यता दी थी.

दिवा के लिए छवि परिणाम हो सकता है

भारत में लेबर डे का इतिहास

भारत में मजदूर दिवस जो लोग कामकाजी होते हैं उनके सम्मान के लिए मनाया जाता है. भारत में इसकी शुरुआत लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्‍दुस्‍तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में की थी. हालांकि इसे मद्रास दिवस के रूप में मनाया जाता है. भारत में इस दिन को मनाने का सुझाव  सिंगारवेलु चेट्टियार नामक कम्यूनिस्ट नेता ने दिया था. उनका कहना था कि दुनिया भर के मजदूर इस दिन को मनाते हैं तो भारत में भी इसको मान्यता दी जानी चाहिए.

इस हड़ताल के बाद साल 1889 में पेरिस में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय महासभा की दूसरी बैठक में फ्रेंच क्रांति को ध्यान में रखते हुए एक प्रस्ताव पास किया गया. इस प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाए जाने की बात स्वीकार की गई. इस प्रस्ताव के पास होते ही अमेरिका में सिर्फ 8 घंटे काम करने की इजाजत दे दी गई.

दिवा के लिए छवि परिणाम हो सकता है

जिसके बाद पहली मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाने की शुरूआत हुई. भारत में मजदूर दिवस की शुरुआत चेन्नई में 1 मई 1923 में हुई. भारत में लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 को मद्रास में इसकी शुरुआत की थी.

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