यूपी में राह कठिन है: मोदी, योगी फैक्टर की लड़ाई होगी सपा बसपा महागठबंधन से |UP|NewsRedbull

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By : News RedBull | Published On: Mar 12, 2019 |
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यूपी में राह कठिन है: मोदी, योगी फैक्टर की लड़ाई होगी सपा बसपा महागठबंधन से |UP|NewsRedbull

Lucknow: Online Desk : लोकसभा चुनाव 2014 में अगर भाजपा 282 के जबर्दस्त आंकड़े तक पहुंची तो उसमें सबसे बड़ा योगदान उत्तर प्रदेश की उन 71 सीटों का था जो उसने अपने दम पर जीती थीं।

अपना दल की दो सीटों को मिलाकर उत्तर प्रदेश में एनडीए का आंकड़ा 73 सीट पर जाकर ठहरा। लेकिन अब हालात 2014 जैसे नहीं हैं। इन पांच सालों में गंगा, यमुना और गोमती में काफी पानी बह चुका है। इस बार सबकी निगाहें होंगी योगी आदित्यनाथ पर। उत्तर प्रदेश में उनके नेतृत्व में पहला लोकसभा चुनाव है।

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खबर के अनुसार, 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद से अब तक योगी आदित्यनाथ, पार्टी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद सबसे बड़े प्रचारक के तौर पर उभरे हैं। उनकी अपनी खास छवि है। एक फायरब्रांड हिंदुत्ववादी नेता की पहचान, पार्टी को उत्तर प्रदेश में फायदा पहुंचा सकती है।

BJP के एक वरिष्ठ नेता का दावा है कि लगभग 40 प्रतिशत सीटों पर नए चेहरे उतारे जाने की संभावना है.

ख़बर के मुताबिक़ यह फ़ैसला अगले दो-तीन दिनों में होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में लिया जाएगा. पहले चरण में 11 अप्रैल को होने वाले चुनाव के लिए 91 उम्मीदवारों के नामों की सूची को अंतिम रूप दिया जाएगा.

पार्टी हर उम्मीदवार को चुनाव प्रचार के लिए कम से कम एक महीने का समय देना चाहती है.

भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रविवार को इंडिया टीवी के एक कार्यक्रम में कहा है कि भारत ने 1971 के युद्ध के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा पार किया. जेटली ने कहा, ''हमारे प्रधानमंत्री ने नीति बदली है. पहले की सरकारें अपना इंटेलिजेंस और सुरक्षा बलों को चाक चौबंद करती थीं ताकि हमले को रोका जा सके. हम अब दो क़दम आगे बढ़ गए हैं.''

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जेटली ने कहा, ''हमारी नीति है कि जहां आतंकी तैयार किए जा रहे हैं वहीं हमला किया जाए. पाकिस्तान का न्यूक्लियर ब्लफ़ भी अब सामने आ गया है. भारत की सेना सक्षम है और आतंक के ख़िलाफ़ जवाब देने में तत्पर रहेगी.''

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के हवाले से जो चीज़ें कहीं जा रही हैं और दावे किए जा रहे हैं, उनका लब्बोलुआब यही है, 'एक बार फिर से मोदी सरकार.'

पुलवामा की आतंकी घटना और भारत की एयर स्ट्राइक के बाद बदले माहौल में देखना दिलचस्प होगा कि रुझान किस ओर जाता है। आतंकवाद से लड़ने के लिए वायुसेना का इस्तेमाल करने का भारत के फ़ैसले को अहम माना जा रहा है. 

इसका मतलब ये हुआ कि जो लोग भी उन्हें चुनौती देने वाले थे या उनकी आलोचना कर रहे थे, उन लोगों की मुहिम अब ठंडी पड़ गई है.

ऐसा इसलिए कि चुनाव की तारीख़ों की घोषणा अब हो गई है. जनवरी से देखें तो ज़्यादा वक़्त नहीं बीता है पर उस वक़्त देश का मूड कुछ और लग रहा था.

फ़रवरी की घटनाओं के बाद देश का मूड अब कुछ और लग रहा है. चुनाव में अब ज़्यादा वक्त नहीं बचा है और भारतीय जनता पार्टी का पलड़ा इस समय ज़्यादा भारी लग रहा है.

लेकिन जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ेंगे, तस्वीर बदल सकती है. बीजेपी के पास बालाकोट के अलावा भी मुद्दे हैं. जो भी उन्होंने किया है. विकास या जनधन जैसे मुद्दों पर उनका ज़ोर रहेगा.

CM Yogi एक सख्त प्रशासक के तौर पर देखे जाते हैं। हालांकि, 2018 में गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में हुए लोकसभा उपचुनाव में योगी को मुंह की खानी पड़ी थी जब सपा-बसपा गठबंधन और राष्ट्रीय लोकदल ने करारी मात दी। वो अपना गढ़ गोरखपुर तक बचाने में असफल रहे।

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चुनाव विश्लेषकों की मानें तो ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ अब भी सबसे बड़ा चेहरा हैं। सबसे ज्यादा भीड़ खींचने वाला नाम हैं।

वो गोरखनाथ पीठ के महंत हैं। तमाम प्रदेशों में फैला नाथ संप्रदाय उन्हें सम्मान की नजर से देखता है। योगी खुद, लोकसभा चुनाव 2019 में 75 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हैं।

लेकिन, ये इतना आसान भी नहीं रहने वाला। कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को योगी के प्रभाव वाले क्षेत्र यानी पूर्वी यूपी की कमान सौंपी है। जाहिर है, प्रियंका की स्टार छवि और उनके तेवर, योगी को परेशान करने वाले हैं।

 

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि RBI पर नोटबंदी थोपी गई. उन्होंने कहा कि ये बहुत बड़ा घोटाला था.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि नोटबंदी दरअसल, बीजेपी की मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम थी.

जयराम रमेश

उन्होंने कहा, "आठ नवंबर 2016 को तुग़लकी फ़रमान जारी कर नोटबंदी कर दी गई. तर्क दिया गया कि इससे फ़र्ज़ी करेंसी और ब्लैकमनी बंद हो जाएगी और आतंकवादी हमले बंद हो जाएंगे. उसी दिन साढ़े पाँच बजे रिज़र्व बैंक के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की बैठक हुई. इसके ब्यौरे एक आरटीआई के ज़रिए मिले हैं."

जयराम रमेश ने कहा कि नोटबंदी आरबीआई पर थोपी गई और ये बहुत बड़ा घोटाला है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ आरबीआई ने कहा है कि नोटबंदी के दौरान पेट्रोल पंप, रेलवे टिकट और बिजली पानी आदि के बिलों के भुगतान में लोगों द्वारा इस्तेमाल किए गए 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोटों का उसके पास कोई आंकड़ा नहीं है.

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