वैज्ञानिकों को मिला डायनासोर के विलुप्त होने का नया साक्ष्य |NewsRedbull

'साइंस एडवांसेस' नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि भूकंप के प्रभाव से पानी के नीचे भी ज्वालामुखी से उग्र रूप से मैग्मा निकला होगा, जिससे पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा होगा।

By : News RedBull | Published On: Feb 16, 2018 |
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वैज्ञानिकों को मिला डायनासोर के विलुप्त होने का नया साक्ष्य |NewsRedbull

न्यूयॉर्क: करोड़ों वर्ष पूर्व क्षुद्र ग्रह के पृथ्वी से टकराने पर दुनियाभर में ज्वालामुखी मैग्मा भड़कने के कारण धरती से डायनासोर विलुप्त हो गए होंगे। एक नए शोध में वैज्ञानिकों ने इस नई धारणा के पक्ष में साक्ष्य मिलने का दावा किया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, छह मील चौड़ा एक क्षुद्र ग्रह करीब 6.6 करोड़ वर्ष पूर्व मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप से टकराया था, जिससे धरती और समुद्र दोनों में भीषण भूकंप आया था। 

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  'साइंस एडवांसेस' नामक पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन में कहा गया है कि भूकंप के प्रभाव से पानी के नीचे भी ज्वालामुखी से उग्र रूप से मैग्मा निकला होगा, जिससे पर्यावरण पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा होगा। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक जोसेफ बायर्न्‍स ने कहा, 'हमें पूर्व में सामूहिक विलुप्ति की घटना के दौरान अज्ञात समयावधि के दौरान दुनिया में शक्तिशाली ज्वालामुखी स्फोट के साक्ष्य मिले हैं।'

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धरती पर डायनासोर नामक जीव था जो करोड़ों साल पहले विलुप्त हो चुके हैं लेकिन आज भी उसके बारे में जानने की इच्छा हम सभी के अन्दर होती है। डायनासोर का अर्थ होता है दैत्याकार छिपकली। ये छिपकली और मगरमच्छ कुल के जीव थे। ज्यूरासिक काल (25 करोड़ वर्ष ) से क्रेटेशियस काल (6 करोड़वर्ष ) के बीच धरती पर इनका ही अस्तित्व था। उस काल में इनकी कई प्रजातियां धरती पर उपस्थित थीं। इनकी कुछ ऐसी प्रजातियां भी थीं, जो पक्षियों के तरह उड़ती थीं। ये सभी डायनासोर सरिसृप समूह के थे। एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि करीब 10 करोड़ साल पहले डायनासोर्स आर्कटिक के जंगलों में घूमा करते होंगे।

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1980 के दशक में जब आज के मेक्स्किो में चिक्जुलुब के पास उल्कापात का सबूत मिला था, तब से वैज्ञानिकों के बीच यह भी विवाद बना हुआ है कि क्या क्षुद्र ग्रह के टकराने या किसी ज्वालामुखी स्फोट के कारण भारत के दक्कन क्षेत्र में सब कुछ समाप्त हो गया था, जिसके कारण गैर-पक्षी समूह के जीव डायनासोर मर गए।   

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ओरेगन विश्वविद्यालय के प्रोफेर लीफ कार्लस्ट्रोम के मुताबिक, विविध अध्ययनों से इस बात के संकेत मिलते हैं कि दक्कन क्षेत्र में कई ज्वालामुखी उल्कापात होने के पहले से ही जाग्रत थे। इस प्रकार उल्कापात होने से धरती पर भूकंप संबंधी तरंगों में तेजी आई और विस्फोट की रफ्तार तीव्र हो गई।   कार्लस्ट्रोम ने कहा, 'हमारे शोध कार्य में संपूर्ण धरती पर हुई इन दुर्लभ व विनाशकारी घटनाओं के बीच संबंध है। उल्कापात के प्रभाव से ज्वालामुखी स्फोट हुए होंगे, जो पहले से ही जारी थे और इनका दोतरफा असर पड़ा होगा।'

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