फलस्तीन ने कहा- ‘यह ज़ंग का ऐलान है’ ... ट्रम्प के फैसले के खिलाफ मुस्लिम देशों में विरोध प्रदर्शन

मिस्र की सबसे बड़ी धार्मिक दर्सगाह जामिया अल अजहर के प्रमुख डॉ अहमद अल तैयब ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अधिकृत बैतूल मुक़द्दस को यहूदी राज्य की राजधानी करार देना बेहद खतरनाक कदम है, और इसके विनाशकारी परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने ट्रम्प के फैसले को रद्द करने के लिए विश्व इस्लामी सम्मेलन की भी मांग की है।

By : News RedBull | Published On: Dec 07, 2017 |
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 फलस्तीन ने कहा- ‘यह ज़ंग का ऐलान है’ ... ट्रम्प के फैसले के खिलाफ मुस्लिम देशों में विरोध प्रदर्शन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा येरूशलम को इस्राइल की राजधानी की मान्यता देने के बयान के बाद गाजा से लेकर जॉर्डन व टर्की तक पूरे क्षेत्र में विरोध शुरू हो गया है। मिस्र की सबसे बड़ी धार्मिक दर्सगाह जामिया अल अजहर के प्रमुख डॉ अहमद अल तैयब ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अधिकृत बैतूल मुक़द्दस को यहूदी राज्य की राजधानी करार देना बेहद खतरनाक कदम है, और इसके विनाशकारी परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने ट्रम्प के फैसले को रद्द करने के लिए विश्व इस्लामी सम्मेलन की भी मांग की है। 
उधर फिलिस्तीनी इस्लामी आन्दोलन ‘हमास’ ने अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से यरूशलेम को इजराइल की राजधानी के रूप में क़रार देने के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है। जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, फिलीस्तीनी इस्लामिक मूवमेंट द्वारा कब्जा कर लिया गया था। हमास ने चेताया कि डोनाल्ड ट्रम्प के कदम ने अमेरिकी हितों के खिलाफ जहन्नुम के दरवाज़े खोल दिए है। 
तमाम देशों की चेतावनी के बावजूद ट्रंप ने अमेरिकी दूतावास तेल अवीव से येरूशलम स्थानांतरित करने का आदेश अमेरिकी विदेश विभाग को बुधवार को दिया। उन्होंने कहा कि शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में उन्होंने यह बहुप्रतीक्षित कदम उठाया है।

ट्रंप ने कहा कि मैंने तय किया है, येरूशलम को इस्राइल की राजधानी के तौर पर मान्यता दी जाए. मुझसे पहले के राष्ट्रपतियों ने अपने चुनाव प्रचार में इसे मुद्दा तो बनाया था लेकिन जीतने के बाद वे सब अपने वादे मुकर गये, लेकिन मैं अपना वादा पूरा कर रहा हूं। 
गौरतलब है कि ट्रंप ने 1995 में बने एक अमेरिकी कानून के तहत यह कदम उठाया है जिसमें अमेरिकी दूतावास को येरूशलम स्थानांतरित करने का प्रावधान किया गया था। 

  ट्रंप के पहले के राष्ट्रपतियों, बिल क्लिंटन, जॉर्ज बुश व बराक ओबामा ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के मद्देनजर इस तरह के फैसले को टालते रहे थे।  फिलिस्तीन के एक राजनयिक ने कहा है कि ट्रंप का फैसला मिडिल ईस्ट में युद्ध की घोषणा करने वाला है।

 यहां तक कि पोप फ्रांसिस तक ने शांति बनाये रखने के लिए येरूशलम में यथास्थिति बनाये रखने की बात कही थी लेकिन ट्रंप के आदेश से पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और समूची दुनिया इसकी तपिश महसूस करेगी।  चीन और रूस ने पूरे मामले पर चिंता जताते हुए कहा है कि अमेरिका की इस योजना से मिडिल ईस्ट में स्थितियां और खराब होंगी।  

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