मोतीलाल नेहरु, जवाहर, इंदिरा, राजीव और सोनिया की विरासत, अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी ने भरा पर्चा

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By : News RedBull | Published On: Dec 04, 2017 |
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मोतीलाल नेहरु, जवाहर, इंदिरा, राजीव और सोनिया की विरासत, अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी ने भरा पर्चा

नई दिल्ली : कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज अध्यक्ष पद के लिए नामांकन भर दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनके नाम के प्रस्तावकों में शामिल रहे। समझा जा रहा है कि चुनाव में राहुल अकेले उम्मीदवार ही रहेंगे। सोमवार को नामांकन की आखिरी तारीख है। 
LIVE UPDATE : कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी ने पर्चा भरा, ताजपोशी के लिए पहला कदम पूरा
रविवार तक किसी ने भी नामांकन दाखिल नहीं किया था।  पांच दिसंबर को इनकी स्क्रूटनी होगी। अगर राहुल के खिलाफ कोई और कैंडिडेट नॉमिनेशन फाइल नहीं करता है तो पांच दिसंबर को ही यह तय हो जाएगा कि वे ही अगले पार्टी अध्यक्ष होंगे। ऐसा हुआ तो वे इस पद पर पहुंचने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे शख्स होंगे। 

वह अपनी मां सोनिया गांधी के उत्तराधिकारी होंगे जो इस पद पर 19 साल से विराजमान हैं. पार्टी सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी नामांकन पत्र के चार सेट दाखिल करेंगे. वरिष्ठ पार्टी नेता सोनिया गांधी, मनमोहन सिंह, गुलाम नबी आजाद, एके एंटनी और अहमद पटेल तथा पार्टी के मुख्यमंत्री प्रस्तावक के रूप में पत्रों पर हस्ताक्षर करेंगे. रामचंद्रन ने कहा, ‘‘अब तक प्रदेश इकाई प्रतिनिधियों को 90 नामांकन दिए गए. नामांकन के लिए अब तक कोई आवेदन दाखिल नहीं हुआ है और आज नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है.’’

 पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू को 1919 में अमृतसर के अधिवेशन में कांग्रेस का अध्यक्ष चुना गया था. इसके बाद 1928 में कोलकाता अधिवेशन में उनको अध्यक्ष चुना गया था. 

मोतीलाल नेहरू का कांग्रेस में काफी प्रभाव था. पंडित जवाहर लाल नेहरू कांग्रेस के 8 बार बनाए गए. 1929 में हुए लाहौर अधिवेशन में उनको पहली बार यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. इसके बाद उनको 1930,1936,1937,1951, 1952, 1953 और 1954 में कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए. जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद उनकी बेटी इंदिरा गांधी को कांग्रेस की कमान सौंप दी गई. वह चार बार कांग्रेस की अध्यक्ष रह चुकी हैं. 
पहली बार उनको 1959 के विशेष अधिवेशन में अध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद इंदिरा ने कांग्रेस में ऐसा अधिपत्य जमाया गया कि पार्टी के नेता 'इंदिरा इज इंडिया, इंडिया इज इंदिरा' का नारा देने लगे.

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