मोदी सरकार लाएगी सख्त कानून, दिया अगर 3 तलाक तो होगी 3 साल की सजा

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By : News RedBull | Published On: Dec 02, 2017 |
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मोदी सरकार लाएगी सख्त कानून, दिया अगर 3 तलाक तो होगी 3 साल की सजा

नई दिल्ली ( 2 दिसंबर ): सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद तीन तलाक पर लगाम नहीं लग रही है। अब तीन तलाक को रोकने के लिए सरकार कानून बनाने जा रही है। कानून के मसौदे के अनुसार एक बार में तीन तलाक देना अवैध माना जाएगा और इसके लिए पति को तीन साल की जेल भी हो सकती है।   ड्राफ्ट 'मुस्लिम विमिन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज बिल' को शुक्रवार को राज्य सरकारों के पास भेजा गया है, जिससे इस पर उनके विचार भी लिए जा सकें। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने यह जानकारी दी है। संसद के शीतकालीन सत्र में तीन तलाक पर कानून लाया जा सकता है।  
 अधिकारी ने बताया कि राज्यों से तत्काल इस ड्राफ्ट पर जवाब देने को कहा गया है। इस ड्राफ्ट को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह ने तैयार किया है। समूह के अन्य सदस्यों में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद और मंत्रालय में उनके जूनियर पी. पी. चौधरी शामिल हैं। यह प्रस्तावित कानून केवल एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) के मामलों पर ही लागू होगा।   
कानून बनने से पीड़ितों को अधिकार मिल जाएगा, जिससे वे मैजिस्ट्रेट के पास जाकर अपने और बच्चों के लिए गुजारा भत्ते की मांग कर सकें। इतना ही नहीं, महिला मैजिस्ट्रेट से अपने नाबालिग बच्चों की कस्टडी लेने की भी मांग कर सकती है। कानून के मसौदे के तहत ट्रिपल तलाक किसी भी रूप में- बोलकर, लिखित या ईमेल, SMS और वॉट्सऐप से अवैध और अमान्य होगा। 

तीन तलाक पर प्रस्तावित नए कानून से जुड़ी अहम बातें
  1. यह मसौदा गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाले एक अंतर-मंत्री समूह ने तैयार किया है. इस में अन्य सदस्य विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद और विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी थे.
  2. प्रस्तावित कानून एक बार में तीन तलाक या 'तलाक ए बिद्दत' पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने तथा नाबालिग बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा.
  3. इसके तहत पीड़ित महिला मजिस्ट्रेट से नाबालिग बच्चों के संरक्षण का भी अनुरोध कर सकती है और मजिस्ट्रेट इस मुद्दे पर अंतिम फैसला करेंगे.
  4. मसौदा कानून के तहत, किसी भी तरह का तीन तलाक (बोलकर, लिखकर या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सएप जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से) गैरकानूनी होगा.
  5. मसौदा कानून के अनुसार, एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी और शून्य होगा और ऐसा करने वाले पति को तीन साल के कारावास की सजा हो सकती है. यह गैर-जमानती और संज्ञेय अपराध होगा.
  6. प्रस्तावित कानून जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू होना है.
  7. तलाक और विवाह का विषय संविधान की समवर्ती सूची में आता है और सरकार आपातकालीन स्थिति में इस पर कानून बनाने में सक्षम है, लेकिन सरकारिया आयोग की सिफारिशों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राज्यों से सलाह करने का फैसला किया.
  8. अधिकारी ने कहा कि इसे संसद के शीतकालीन सत्र में लाने की योजना है.
  9. संसद का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से शुरू होगा और 5 जनवरी तक चलेगा.
  10. पिछले दिनों गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि यह भारत के लोगों की मजबूत इच्छा है कि संसद तीन तलाक और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग इन दोनों मुद्दों पर कानून बनाए और सरकार इस इच्छा को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. (इनपुट एजेंसी से)

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