झांसी की रानी से मिलती थी इनकी शक्ल, इसलिए मिली थी इतनी दर्दनाक मौत...

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By : News RedBull | Published On: Nov 16, 2017 |
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झांसी की रानी से मिलती थी इनकी शक्ल, इसलिए मिली थी इतनी दर्दनाक मौत...

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महारानी लक्ष्मीबाई की विश्वासपात्र सिपाही झलकारीबाई का जन्म भोजला गांव में 22 नवंबर 1830 को हुआ था। 1857 में अंग्रेजों ने झांसी किले पर हमला कर दिया था। 

रानी का एक सेनानायक गद्दार निकला, उसकी मदद से अंग्रेज किले तक पहुंचने में कामयाब हो गए।  जब रानी चारों तरफ से घिर गईं, तो झलकारी ने उनसे कहा कि आप जाइए, मैं आपकी जगह लड़ती हूं। 

रानी किले से निकल गईं और झलकारी उनके वेश में लड़ती रहीं। इसी बीच अंग्रेज सरकार के मुखबिर ने जनरल रोज को पूरा रहस्य बता दिया और झलकारी पकड़ी गईं। रोज ने झलकारी से कहा- लड़की तूं पागल है, अगर ऐसे पागल लोग हो जाएं तो हिंदुस्तान में हमारा रहना मुश्किल हो जाएगा। झलकारीबाई को अंग्रेजों ने तोप के मुंह में बांध दिया और बारूद से उड़ा दिया था।

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झलकारी बाई का पति पूरन किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गया लेकिन झलकारी ने बजाय अपने पति की मृत्यु का शोक मनाने के, ब्रिटिशों को धोखा देने की एक योजना बनाई। झलकारी ने लक्ष्मीबाई की तरह कपड़े पहने और झांसी की सेना की कमान अपने हाथ में ले ली। जिसके बाद वह किले के बाहर निकल ब्रिटिश जनरल ह्यूग रोज़ के शिविर मे उससे मिलने पहँची।


 ब्रिटिश शिविर में पहुँचने पर उसने चिल्लाकर कहा कि वो जनरल ह्यूग रोज़ से मिलना चाहती है। रोज़ और उसके सैनिक प्रसन्न थे कि न सिर्फ उन्होने झांसी पर कब्जा कर लिया है बल्कि जीवित रानी भी उनके कब्ज़े में है। जनरल ह्यूग रोज़ जो उसे रानी ही समझ रहा था, ने झलकारी बाई से पूछा कि उसके साथ क्या किया जाना चाहिए? तो उसने दृढ़ता के साथ कहा,मुझे फाँसी दो। 


जनरल ह्यूग रोज़ झलकारी का साहस और उसकी नेतृत्व क्षमता से बहुत प्रभावित हुआ और झलकारी बाई को रिहा कर दिया गया। इसके विपरीत कुछ इतिहासकार मानते हैं कि झलकारी इस युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हुई। एक बुंदेलखंड किंवदंती है कि झलकारी के इस उत्तर से जनरल ह्यूग रोज़ दंग रह गया और उसने कहा कि "यदि भारत की १% महिलायें भी उसके जैसी हो जायें तो ब्रिटिशों को जल्दी ही भारत छोड़ना होगा"।

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राष्ट्र कवि मैथिली शरण गुप्ता ने झलकारी बाई के बारे में ये लिखा था...

जाकर रण में ललकारी थी,
वह तो झांसी की झलकारी थी,
गोरों से लड़ना सिखा गई,
है इतिहास में झलक रही,
वह भारत की ही नारी थी।

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