नेहरु एक व्यक्ति नहीं, खुद में विचार धारा थे- वामपंथियों से मिले धोखे का किया था डटकर सामना

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By : News RedBull | Published On: Nov 14, 2017 |
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नेहरु एक व्यक्ति नहीं, खुद में विचार धारा थे- वामपंथियों से मिले धोखे का किया था डटकर सामना

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14 नवंबर को देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन पर देश में बाल दिवस मनाया जाता है.  वो बच्चों को काफी प्यार करते थे. जिसकी वजह से उनको चाचा नेहरू भी बुलाया जाता है. जवाहरलाल नेहरू अपनी जिंदगी को काफी रॉयल अंदाज में जीते थे.
 चीन और सोवियत संघ से झटके खाने के बाद यदि जवाहर लाल नेहरू कुछ अधिक दिनों तक जीवित रहते तो वे संभवतः भारत की विदेश नीति को पूरी तरह बदल देते. उसका असर घरेलू नीतियों पर भी पड़ सकता था. चीन के हाथों भारत की शर्मनाक पराजय के दिनों के कुछ दस्तावेजों से यह साफ है कि नेहरू के साथ न सिर्फ चीन ने धोखा किया बल्कि सोवियत संघ ने भी मित्रवत व्यवहार नहीं किया. इतिहास गवाह है कि चीन के भारत पर हुए हमले पर देश के वामपंथियों ने किस तरह हमलावर चीन के सुर में सुर मिलाया था यहाँ तक कि साम्राज्यवादी चीन को अपना भाई बताते हुए ये प्रचारित किया कि हमला भारत ने किया था. सदियाँ बीत जाएगी लेकिन जब लोग इतिहास पढेगे तो वामपंथियों के इस रुख पर उन्हें हैरानी जरूर होगी. यहाँ तक कि आज भी कोई वामपंथी बड़ा नेता चीन से मिले धोखे की खुलकर मुखालफ़त आखिर क्यों नहीं करता ? आप उस समय की कल्पना कीजिये जब भारत देश पर चीन का हमला हुआ और देश की ही वामपंथी पार्टी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरु को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया. 
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याद रहे कि जवाहर लाल नेहरू उन थोड़े से उदार नेताओं में शामिल थे जो समय -समय पर अपनी गलतियों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करते रहे. कांग्रेस पार्टी के भीतर भी कई बार वे अपने सहकर्मियों की राय के सामने झुके. 1950 में नेहरू ने पहले तो राज गोपालाचारी को राष्ट्रपति बनाने की जिद की,पर जब उन्होंने देखा कि उनके नाम पर पार्टी के भीतर आम सहमति नहीं बन रही है तो नेहरू बेमन से राजेंद्र बाबू के नाम पर राजी हो गए. आजादी के बाद भारत ने गुट निरपेक्षता की नीति अपनाने की घोषणा की थी. पर वास्तव में कांग्रेस सरकारों का झुकाव सोवियत लाॅबी की ओर था.
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 यदि नेहरू 1962 के बाद कुछ साल जीवित रहते तो अपनी विदेश नीति को बदल कर रख देते. एक संवदेनशील प्रधानमंत्री, जो देश के लोगों का ‘हृदय सम्राट’ था, 1962 के धोखे के बाद भीतर से टूट चुका था. इसलिए वह युद्ध के बाद सिर्फ 18 माह ही जीवित रहे. चीन युद्ध में पराजय से हमें यह शिक्षा मिली कि किसी भी देश के लिए राष्ट्रहित और सीमाओं की रक्षा का दायित्व सर्वोपरि होना चाहिए. भारत सहित विभिन्न देशों की जनता भी आम तौर इन्हीं कसौटियों पर हमारे हुक्मरानों को कसती रहती है.
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वे दिखने में काफी साधारण थे लेकिन उनके रहने का अंदाज काफी शानदार रहा है. उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको बता
ने जा रहे हैं जवाहरलाल नेहरू से जुड़े ऐसे फैक्ट्स, जो बहुत कम लोग जानते हैं....


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अपने नाई के लिए लंदन से लाए घड़ी
जवाहरलाल नेहरू को एक बार लंदन जाने वाले थे. उनका नाई हमेशा लेट हो जाया करता था. नेहरूजी के पूछने पर नाई ने कहा- 'मेरे पास घड़ी नहीं है, जिसके कारण वो हमेशा लेट हो जाया करते हैं.' जिसके बाद वो लंदन से नई घड़ी लाए थे.
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नेहरूजी के कहने पर टाटा ने बनाया था लैक्मे ब्यूटी प्रोडक्ट
लैक्मे ब्यूटी प्रोडक्ट देश का जाना माना नाम है. लेकिन, इसके बनने के पीछे की कहानी थोड़ी दिलचस्प है. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इस बात को लेकर चिंति‍त थे कि भारतीय महि‍लाएं ब्‍यूटी प्रोडक्‍ट्स पर बड़े पैमाने पर वि‍देशी मुद्रा खर्च कर रही हैं. जिसको देखते हुए नेहरू ने जेआरडी टाटा ने ब्यूटी प्रोडक्ट बनाने का निवेदन किया. जिसके बाद लैक्मे मार्केट में आया.
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जब पहली बार विदेश से आई नेहरूजी के लिए कार
नेहरूजी को कार से घूमने का काफी शौक था. मोतीलाल नेहरू भी ये बात अच्छे से जानते थे. मोतीलाल नेहरू ने बेटे के लिए विदेशी कार मंगवाई थी. आपको बता दें, इलाहाबाद की सड़कों पर आने वाली यह पहली कार थी.

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