आज सरकार के अलावा कोई और नहीं निकल सकेगा टीपू जयंती पर जुलूस, बेंगलुरु में कड़ी सुरक्षा,

बताते चले कि टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवम्बर 1750 को कर्नाटक के देवनाहल्ली (यूसुफ़ाबाद) (बंगलौर से लगभग 33 (21 मील) किमी उत्तर मे) हुआ था। उनका पूरा नाम सुल्तान फतेह अली खान शाहाब था। उनके पिता का नाम हैदर अली और माता का नाम फ़क़रुन्निसा था। उनके पिता [हैदर अली] मैसूर साम्राज्य के सैनापति थे। जो अपनी ताकत से 1761 मे मैसूर साम्राज्य के शासक बने। टीपू को मैसूर के शेर के रूप में जाना जाता है। योग्य शासक के अलावा टीपू एक विद्वान, कुशल़॰य़ोग़य सैनापति और कवि भी थे। टीपू सुल्तान ने हिंदू मन्दिरों को तोहफ़े पेश किए। मेलकोट के मन्दिर में सोने और चांदी के बर्तन है, जिनके शिलालेख बताते हैं कि ये टीपू ने भेंट किए थे। ने कलाले के लक्ष्मीकान्त मन्दिर को चार रजत कप भेंटस्वरूप दिए थे। 1782 और 1799 के बीच, टीपू सुल्तान ने अपनी जागीर के मन्दिरों को 34 दान के सनद जारी किए। इनमें से कई को चांदी और सोने की थाली के तोहफे पेश किए। ननजनगुड के श्रीकान्तेश्वर मन्दिर में टीपू का दिया हुअ एक रत्न-जड़ित कप है। ननजनगुड के ही ननजुनदेश्वर मन्दिर को टीपू ने एक हरा-सा शिवलिंग भेंट किया। श्रीरंगपटना के रंगनाथ मन्दिर को टीपू ने सात चांदी के कप और एक रजत कपूर-ज्वालिक पेश किया

By : News RedBull | Published On: Nov 10, 2017 |
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आज सरकार के अलावा कोई और नहीं निकल सकेगा टीपू जयंती पर जुलूस, बेंगलुरु में कड़ी सुरक्षा,

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बेंगलुरू: टीपू सुल्तान की जयंती के मौके पर कल सरकार द्वारा कर्नाटक में आयोजित ‘टीपू जयंती’ समारोहों के मद्देनजर पूरे शहर में सुरक्षा कड़ी की गयी है. संवेदनशील स्थानों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. पुलिस के अनुसार शहर में राज्य सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम को छोड़कर टीपू जयंती से संबंधित जुलूस निकालने की इजाजत नहीं होगी. बेंगलुरू के पुलिस आयुक्त टी सुनील कुमार ने कहा, ‘‘हम किसी जुलूस के लिए कोई अनुमति नहीं दे रहे है चाहे वह टीपू जयंती के पक्ष में हो या फिर खिलाफ में. सरकार शहर के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित कर रही है जिसके लिए हमने पर्याप्त प्रबंध किये हैं.’’
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 उन्होंने कहा कि कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस (केएसआरपी) की 30 टुकड़ियों और 25 सशस्त्र दलों के अलावा शहर पुलिस के पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को तैनात किया जायेगा. कुमार ने कहा, ‘‘पूरे शहर में 11 हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात होंगे. इसके अलावा हम होमगार्ड के जवानों को भी तैनात करेंगे.’’
  उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा तय किये गये स्थानों पर ही समारोहों का आयोजन होगा और जो भी अशांति पैदा करने की कोशिश करेंगे उनके खिलाफ पुलिस सख्ती से निपटा जायेगा. कुमार ने कहा, ‘‘हमने अब तक एहतियातन किसी को गिरफ्तार नहीं किया है लेकिन यदि कोई अप्रिय स्थिति पैदा होती है तो धारा 144 लगायी जा सकती है.’’ राज्य की सिद्दारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने दो वर्ष पहले टीपू जयंती मनाना शुरू किया था. 
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भारतीय जनता पार्टी, कुछ दक्षिणपंथी समूहों और कोडावा समुदाय के सदस्यों ने समारोह मनाये जाने का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि टीपू एक धार्मिक ‘‘कट्टरवादी’’ थे जिन्होंने कई लोगों की हत्या की और लोगों को इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया.

‘राम’ नाम लिखी टीपू सुल्‍तान की अंगूठी सवा करोड़ रुपए में हुयी नीलाम
बताते चले कि 26 अक्टूबर को लन्दन में 18वीं शताब्दी के भारतीय शासक टीपू सुल्तान से जुड़ी अंगूठी लंदन में नीलाम की गई है। सोने से बनी इस अंगूठी को करीब सवा करोड़ रुपए में क्रिस्टीन नीलामी हाउस द्वारा नीलाम किया गया। बताया जाता है कि अंगूठी मुस्लिम किंग टीपू सुल्तान की है। अंगूठी की खास बात ये है कि टीपू एक मुस्लिम शासक थे जबकि इस अंगूठी पर हिंदू भगवान ‘राम’ का नाम लिखा हुआ है। टीपू सुल्तान को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले शासक के रूप में भी जाना जाता है। राम नाम लिखी इस अंगूठी को ब्रिटिश जनरल ने टीपू सुल्तान से शव से निकाला था। 41.2 ग्राम की इस सोनी की अंगूठी को एक अनजान शख्स ने दस गुना ज्यादा बोली लगाकर खरीदा है।
 क्रिस्टीन नीलामी हाउस की वेबसाइट के अनुसार अंगूठी पर देवनागरी भाषा में भगवान राम का नाम लिखा है। कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि टीपू सुल्तान पूर्व के मुस्लिम शासकों की तुलना में हिंदुओं से ज्यादा सहानुभूति रखते थे। खबर के अनुसार इस अंगूठी को टीपू सुल्तान की मृत्यु के बाद उनके शव से निकाला गया था। कहा जाता है कि 4 मई 1799 को 48 वर्ष की उम्र में श्रीरंगपट्टना में टीपू सुल्तान को धोके से अंग्रेजों द्वारा कत्ल किया गया था। टीपू अपनी आखिरी सांस तक अंग्रेजो से लड़ते लड़ते शहीद हो गए। अंगूठी के साथ उनकी तलवार भी अंग्रेजी हुकूमत अपने साथ ले गई थी।

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