‘राम’ नाम लिखी टीपू सुल्‍तान की अंगूठी सवा करोड़ रुपए में हुयी नीलाम

क्रिस्टीन नीलामी हाउस की वेबसाइट के अनुसार अंगूठी पर देवनागरी भाषा में भगवान राम का नाम लिखा है।

By : News RedBull | Published On: Oct 26, 2017 |
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‘राम’ नाम लिखी टीपू सुल्‍तान की अंगूठी सवा करोड़ रुपए में हुयी नीलाम

लंदन : 18वीं शताब्दी के भारतीय शासक टीपू सुल्तान से जुड़ी अंगूठी लंदन में नीलाम की गई है। सोने से बनी इस अंगूठी को करीब सवा करोड़ रुपए में क्रिस्टीन नीलामी हाउस द्वारा नीलाम किया गया। बताया जाता है कि अंगूठी मुस्लिम किंग टीपू सुल्तान की है। अंगूठी की खास बात ये है कि टीपू एक मुस्लिम शासक थे जबकि इस अंगूठी पर हिंदू भगवान ‘राम’ का नाम लिखा हुआ है। टीपू सुल्तान को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले शासक के रूप में भी जाना जाता है। राम नाम लिखी इस अंगूठी को ब्रिटिश जनरल ने टीपू सुल्तान से शव से निकाला था। 41.2 ग्राम की इस सोनी की अंगूठी को एक अनजान शख्स ने दस गुना ज्यादा बोली लगाकर खरीदा है। क्रिस्टीन नीलामी हाउस की वेबसाइट के अनुसार अंगूठी पर देवनागरी भाषा में भगवान राम का नाम लिखा है।

कुछ एक्सपर्ट का कहना है कि टीपू सुल्तान पूर्व के मुस्लिम शासकों की तुलना में हिंदुओं से ज्यादा सहानुभूति रखते थे। खबर के अनुसार इस अंगूठी को टीपू सुल्तान की मृत्यु के बाद उनके शव से निकाला गया था। कहा जाता है कि 4 मई 1799 को 48 वर्ष की उम्र में श्रीरंगपट्टना में टीपू सुल्तान को धोके से अंग्रेजों द्वारा कत्ल किया गया था। टीपू अपनी आखिरी सांस तक अंग्रेजो से लड़ते लड़ते शहीद हो गए। अंगूठी के साथ उनकी तलवार भी अंग्रेजी हुकूमत अपने साथ ले गई थी।

बताते चले कि टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवम्बर 1750 को कर्नाटक के देवनाहल्ली (यूसुफ़ाबाद) (बंगलौर से लगभग 33 (21 मील) किमी उत्तर मे) हुआ था। उनका पूरा नाम सुल्तान फतेह अली खान शाहाब था। उनके पिता का नाम हैदर अली और माता का नाम फ़क़रुन्निसा था। उनके पिता [हैदर अली] मैसूर साम्राज्य के सैनापति थे। जो अपनी ताकत से 1761 मे मैसूर साम्राज्य के शासक बने। टीपू को मैसूर के शेर के रूप में जाना जाता है। योग्य शासक के अलावा टीपू एक विद्वान, कुशल़॰य़ोग़य सैनापति और कवि भी थे। टीपू सुल्तान ने हिंदू मन्दिरों को तोहफ़े पेश किए। मेलकोट के मन्दिर में सोने और चांदी के बर्तन है, जिनके शिलालेख बताते हैं कि ये टीपू ने भेंट किए थे। ने कलाले के लक्ष्मीकान्त मन्दिर को चार रजत कप भेंटस्वरूप दिए थे। 1782 और 1799 के बीच, टीपू सुल्तान ने अपनी जागीर के मन्दिरों को 34 दान के सनद जारी किए। इनमें से कई को चांदी और सोने की थाली के तोहफे पेश किए। ननजनगुड के श्रीकान्तेश्वर मन्दिर में टीपू का दिया हुअ एक रत्न-जड़ित कप है। ननजनगुड के ही ननजुनदेश्वर मन्दिर को टीपू ने एक हरा-सा शिवलिंग भेंट किया। श्रीरंगपटना के रंगनाथ मन्दिर को टीपू ने सात चांदी के कप और एक रजत कपूर-ज्वालिक पेश किया

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